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सिद्धार्थनगर में शताब्दी वर्ष पर स्वयंसेवकों ने निकाला पथ संचलन

स्वयंसेवकों राष्ट्रभक्ति और समाज सेवा का फैलाया अद्वितीय संदेश

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 100 वर्ष पूरे होने और शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में सिद्धार्थनगर के विभिन्न नगर एवं खण्ड स्तर पर संघ के स्वयंसेवकों ने भव्य पथ संचलन निकाला। यह आयोजन न केवल संघ के शताब्दी वर्ष और सौ वर्ष की उपलब्धियों की गरिमा को दर्शाता है, बल्कि समाज में जागरूकता और संगठन के महत्व को भी उजागर करता है। सोमवार शाम हनुमान मंदिर से प्रारंभ होकर यह पथ संचलन सेंट जेवियर होते हुए स्वामी विवेकानंद चौक से होकर पुनः हनुमान मंदिर पर समाप्त हुआ।

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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना सन 1925 में नागपुर के मोहितबाड़ा स्थान पर विजयादशमी के अवसर पर हुई थी। तब से लेकर आज तक संघ ने अपने उद्देश्यों- राष्ट्रीय एकता, सामाजिक समर्पण और संस्कृति जागरूकता के प्रति अडिग रहते हुए समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का कार्य किया है। 100 वर्षों में संघ ने देश के कोने-कोने में अपने स्वयंसेवकों के माध्यम से राष्ट्रभक्ति और समाज सेवा का अद्वितीय संदेश फैलाया है।

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इस भव्य पथ संचलन में विभाग प्रचारक राजीव नयन, जिला प्रचारक विशाल, नगर संघचालक रणजीत, नगर सह कार्यवाह संतोष, नगर प्रचारक अरूणेश, जिला सह शारीरिक शिक्षण प्रमुख धनंजय, ओमप्रकाश चौबे, प्रेम नारायण, दुर्गेश पाण्डेय, गगन श्रीवास्तव, लाल बाबा, रमेश मणि त्रिपाठी, विकास कदीमी और जय प्रकाश चौबे सहित सैकड़ों स्वयंसेवक शामिल हुए। पथ संचलन में शामिल स्वयंसेवकों ने न केवल संगठन की शक्ति और स्थायित्व का परिचय दिया, बल्कि आम जनता को राष्ट्रभक्ति और समाज सेवा के महत्व से भी अवगत कराया।

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इस आयोजन का उद्देश्य केवल रैली निकालना नहीं था, बल्कि समाज में जागरूकता फैलाना और युवा वर्ग में जिम्मेदारी, अनुशासन और सेवा की भावना उत्पन्न करना भी था। संघ के नेताओं ने बताया कि ऐसे कार्यक्रमों का लक्ष्य

युवाओं में सेवा और देशभक्ति की भावना को और मजबूत करना है। यह आयोजन सिद्धार्थनगर में संघ की मजबूत उपस्थिति और 100 वर्षों की समाज सेवा की यात्रा को प्रदर्शित करता है।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने पिछले एक शताब्दी में शिक्षा, स्वास्थ्य, सांस्कृतिक जागरूकता और विपदा प्रबंधन के क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान दिया है। समाज के जरूरतमंद लोगों की मदद करना, आपदा के समय राहत कार्यों में सक्रिय रहना और सामाजिक एकता को बढ़ावा देना संघ के प्रमुख उद्देश्यों में शामिल हैं। सिद्धार्थनगर में भी संघ हमेशा से समाज सेवा और नागरिक कल्याण के कार्यों में अग्रणी रहा है।

पथ संचलन में शामिल लोगों ने संघ के कार्यकर्ताओं की प्रतिबद्धता और सेवा भाव की सराहना की। आयोजकों ने कहा कि संघ केवल संगठन विस्तार के लिए नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के कल्याण के लिए कार्यरत है। उन्होंने यह भी बताया कि संघ का मूल उद्देश्य प्रत्येक व्यक्ति में संस्कार, अनुशासन और देशभक्ति की भावना विकसित करना है।

पथ संचलन का समापन हनुमान मंदिर में हुआ, जहाँ सभी स्वयंसेवकों ने मिलकर राष्ट्रीय एकता और संगठन की मजबूती की प्रतिज्ञा ली। इस अवसर पर नागरिकों ने कहा कि संघ के कार्य सिर्फ़ संगठन के लिए नहीं, बल्कि पूरे समाज और राष्ट्र के हित में हैं। यह आयोजन सिद्धार्थनगर के लोगों में गर्व और उत्साह भर गया और यह संदेश दिया कि समाज और राष्ट्र की सेवा प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है।

100 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में यह पथ संचलन यह स्पष्ट करता है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अपने मूल उद्देश्यों और सिद्धांतों के प्रति हमेशा समर्पित है। आने वाले समय में भी संघ समाज सेवा और राष्ट्र निर्माण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान देता रहेगा। इसके माध्यम से युवा पीढ़ी में जिम्मेदारी, अनुशासन और सेवा भाव की भावना का विकास होगा। सिद्धार्थनगर में यह आयोजन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की समाज में स्थायी पहचान और उसकी दूरगामी सोच का जीवंत उदाहरण रहा।

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